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कम डेटा में आणविक पूर्वानुमान के लिए MIT का CheMeleon मॉडल

MIT News ने 6 नवंबर 2026 को CheMeleon का विस्तृत विवरण दिया। यह एक मुक्त-स्रोत आणविक आधार मॉडल है, जिसे कार्य-विशिष्ट प्रायोगिक डेटा की कमी होने पर रासायनिक गुणों का पूर्वानुमान लगाने के लिए बनाया गया है। MIT और BASF के शोधकर्ताओं ने इसे विकसित किया है। इसका उद्देश्य दवा और सामग्री की खोज के लिए अणुओं को प्राथमिकता देना है।
इस मॉडल पर आधारित सहकर्मी-समीक्षित शोधपत्र की तारीख घोषणा से पहले की है। यह 7 अगस्त 2026 को ऑनलाइन प्रकाशित हुआ था और Journal of Chemical Information and Modeling के 14 सितंबर 2026 के अंक में प्रकाशित हुआ; इसका एक पुराना संस्करण 2025 से ऑनलाइन उपलब्ध था।
एक संभावित उपयोग हाल ही में खोजे गए कोशिकीय औषधि लक्ष्य के लिए लिगैंड की बंधन-अभिरुचि का अनुमान लगाना है। ऐसे मामलों में शोधकर्ताओं के पास संबंधित गुण के बहुत कम माप होते हैं और उन्हें तय करना होता है कि किन यौगिकों का संश्लेषण और परीक्षण करना उचित है। CheMeleon का काम संभावित उम्मीदवारों के दायरे को सीमित करना है, न कि आणविक व्यवहार का पूरी सटीकता से पूर्वानुमान लगाना।
गणना किए गए विवरणकों पर पूर्व-प्रशिक्षण
CheMeleon को PubChem के लगभग 10 लाख अणुओं और रसायनज्ञों द्वारा कई दशकों में विकसित किए गए लगभग 1,600 आणविक विवरणकों पर पूर्व-प्रशिक्षित किया गया। प्रशिक्षण के लिए लक्ष्य प्रकाशित प्रायोगिक साहित्य से जुटाने के बजाय गणना करके निर्धारित किए गए थे; इनमें आणविक भार और ऑक्सीजन परमाणुओं की संख्या जैसे उदाहरण शामिल थे। इस पर्यवेक्षित पूर्व-प्रशिक्षण में कम शोर वाले, गणना योग्य विवरणकों का इस्तेमाल करके ऐसे आणविक निरूपण बनाए जाते हैं जिन्हें दूसरे कार्यों में भी लागू किया जा सकता है।
इसके बाद इसी पूर्व-प्रशिक्षित मॉडल को विलेयता, श्यानता, जैव-सक्रियता या किसी खास प्रोटीन अथवा एंजाइम के साथ अभिक्रियाशीलता जैसे गुणों के लिए थोड़े-से कार्य-विशिष्ट डेटा पर परिष्कृत किया जा सकता है। CheMeleon एक आधार मॉडल है, जिसमें लगभग 1 करोड़ पैरामीटर हैं और जिसे निर्देशित संदेश-पारण तंत्रिका नेटवर्कों के लिए विकसित किया गया है।
MIT के स्नातक छात्र Akshat Shirish Zalte ने इस तरीके की तुलना विशेषज्ञों द्वारा विकसित पारंपरिक मॉडलों से की। ऐसे मॉडलों में विशेषज्ञ हाथ से यह तय करते हैं कि आणविक आकार, शाखायन या स्थानिक फैलाव जैसे विवरणक विलेयता जैसे गुणों से किस तरह जुड़े हो सकते हैं। इसके बजाय, CheMeleon पूर्व-प्रशिक्षण के दौरान रसायन विज्ञान के सामान्य संबंधों को सीखता है, इसलिए हर नए कार्य के लिए नेटवर्क को सब कुछ शून्य से सीखने की जरूरत नहीं पड़ती।
मानक परीक्षणों के नतीजे और उपयोग के प्रमाण
शोधकर्ताओं ने CheMeleon का मूल्यांकन 58 मानक डेटासेट पर किया। ये डेटासेट छोटे-अणु वाली दवाओं की खोज से जुड़े गुणों को कवर करते हैं और उद्योग के नेतृत्व वाली Polaris मानक-परीक्षण पहल से लिए गए थे। लेखकों द्वारा प्रस्तुत सांख्यिकीय तुलनाओं में CheMeleon ने पारंपरिक आधार मॉडलों से बेहतर प्रदर्शन किया। इनमें आणविक फिंगरप्रिंट और विवरणकों पर लागू Random Forest के साथ-साथ मौजूदा आधार मॉडल भी शामिल थे।
MIT में रासायनिक अभियांत्रिकी के Hoyt Hottel प्रोफेसर William Green ने कहा कि यह मॉडल नए यौगिकों के गुणों का सटीक पूर्वानुमान लगाने के लिए प्रयोगात्मक रूप से जांचे जाने वाले अणुओं की संख्या में भारी कमी लाता है। उन्होंने इस लाभ को संश्लेषण और परीक्षण में लगने वाले समय और खर्च से जोड़ा।
Green ने कहा कि 2026 की शुरुआत में आयोजित OpenADMET प्रतियोगिता की शीर्ष 20 प्रविष्टियों में से नौ ने ऐसे अणुओं के गुणों का पूर्वानुमान लगाने के कार्यप्रवाह में CheMeleon का इस्तेमाल किया, जिनका पहले कभी संश्लेषण नहीं हुआ था।
MIT ने बताया कि कई दवा कंपनियां नियमित रूप से इसका इस्तेमाल करती हैं। Green ने कहा कि कम-से-कम एक अज्ञात कंपनी ने अपने कर्मचारियों को निर्देश दिया कि किसी गुण का मॉडल बनाते समय वे शुरुआत CheMeleon से करें।
मुक्त उपलब्धता और व्यावहारिक सीमाएँ
CheMeleon और इसका पूर्व-प्रशिक्षण ढाँचा मुक्त-स्रोत हैं। उपयोगकर्ता Green के समूह द्वारा विकसित और अनुरक्षित सॉफ़्टवेयर ChemProp के ज़रिए मॉडल डाउनलोड करके उसे परिष्कृत कर सकते हैं। इस परियोजना में MIT के रासायनिक अभियांत्रिकी शोधकर्ताओं के साथ जर्मनी में BASF SE के वैज्ञानिक Jochen Sieg, Christian Feldmann और Miriam Mathea भी शामिल हैं।
खोज दलों के लिए इसका व्यावहारिक महत्व यह है कि किसी नए गुण के लिए सीधे प्रासंगिक प्रशिक्षण डेटा बहुत कम होने पर भी उन्हें दोबारा इस्तेमाल करने लायक शुरुआती मॉडल मिलता है। प्रकाशित मानक-परीक्षण नतीजे और शुरुआती उपयोग दिखाते हैं कि CheMeleon अब केवल एक प्रयोगशाला के प्रदर्शन तक सीमित नहीं है। फिर भी इसकी भूमिका संभावित विकल्पों को प्राथमिकता देने तक ही है: जिन यौगिकों को यह चुनता है, उनके वास्तविक व्यवहार की पुष्टि के लिए अब भी प्रयोग करने पड़ते हैं।












